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Thursday, 28 June 2018







यूजरों का डेटा साझा करने में चालाकी कर रहे Facebook Google 
यूरोपीय संघ द्वारा यूजरों को अधिक नियंत्रण और विकल्प देने के डेटा संरक्षण कानून के बावजूद गूगल और फेसबुक आक्रामक व सीमित डिफ़ॉल्ट विकल्पों का ऑफर देकर के निजी सूचनाओं को साझा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।  इसे अमल में लाने के लिए दोनों कंपनियां बड़ी चालाकी से काम कर रही है। बुधवार को एक सरकारी अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। नॉर्वेयन उपभोक्ता परिषद ने पाया कि दोनों अमेरिकी दिग्गज तकनीकी कम्पनियाँ का प्राइवेसी अपडेट नये जरनल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन ( जीडीपीआर ) का स्पष्ट रूप से उल्लंघन कर रहा है। 
ये वह प्राइवेसी अपडेट है जो यूजरों की निजी जानकारी साझा करते समय यूजरों को विकल्प चुनने के लिए मजबूर करते हैं। परिषद के डिजिटल सेवाओं के निर्देशक फिन मिरस्टेड ने कहा कि Facebook और Google हमें अपने बारे में जानकारियां साझा करने में मदद करती है। यह उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर नए नियमों के मकसद दोनों के प्रति अव्हेलना दर्शाता है। 
मिरस्टेड ने कहा कि Facebook व Google की ऐसी कार्रवाई उनके यूजरों के प्रति सम्मान में कमी का भाव दिखाती है, क्योंकि इस हरकत से यूजरों निजी डाटा पर यूजर्स कंट्रोल का कोई महत्व नहीं रह जाता है। यूरोपीय संघ के नियम लागू होने के कुछ सप्ताह बाद अध्ययन के लिए अप्रैल से जून की शुरुआत में यह सूचना एकत्र की गई थी। 
ट्विटर मांगेगा ईमेल-फोन नंबर 
ट्विटर पर खाता खोलने के लिए अब यूजरों को अपना ईमेल एड्रेस या फोन नंबर भी देना होगा, ताकि कंपनी खाता धारक की पुष्टि कर सके। ट्विटर ने कहा कि वह खास तौर पर सूचित करने वाले स्वचालित बॉट्स द्वारा धोखेबाजी या छल करने के खिलाफ संघर्ष के रूप में नए खातों की पुष्टि करने के लिए यह कार्रवाई शुरू करेगा। इससे ट्विटर का दुरुपयोग भी रोका जा सकेगा। 
एक सरकारी अध्ययन में हुआ खुलासा, आक्रामक व सीमित डिफाल्ट विकल्पों का ऑफर दे रही है दोनों अमेरिकी कंपनियां


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