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Sunday, 10 June 2018

विज्ञान से परे एक और विज्ञान विज्ञान एक ऐसा तरीका है या विधि है जिस पर भरोसा किया जा सकता है तर्क और तथ्य पर जो तरीका आधार बना वह परंपराओं की प्रतिक्रिया के रूप में आया लेकिन ऐसा था नहीं लोग इस नतीजे पर पहुंचे कि ऐसी किसी भी चीज का अस्तित्व नहीं हो सकता जो तार्किक तौर पर सही नहीं हो तर्क के प्रति समर्पण के चक्कर में हमने जिंदगी के आनंद को खो दिया इससे एक ऐसा समाज विकसित हुआ जो अधीनस्थ को मानता है और उपकार की अपेक्षा करता है पूर्वी देशों में भी ऐसी ही सोच रही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा वैज्ञानिक नहीं है बहुत कुछ इस बात पर निर्भर है कि हम बुद्धि चाहते हैं तेज यमन जाहिर है तेजी जाएंगे बुद्धि के जरिए चीजों और कृतियों को अच्छी तरह समझा जा सकता है योग विज्ञान में इंसान की प्रज्ञा की कारों को अच्छी तरह समझाया गया है अगर प्रज्ञा या मेघा पर भरोसा नहीं करेंगे तो सब ऐसे ही चलता रहेगा इंसान की प्रज्ञा की और भी कई पहलू हैं अलग-अलग खंडों में विभाजित है अगर दूसरे पैरों पर भी ध्यान दिया जाए तो वैज्ञानिक कहीं ज्यादा उपयोग चीजें बना पाएंगे यह समझना होगा कि वास्तव में देखना किसे कहते हैं अभी हम यह कोई भी व्यक्ति ऐसी स्थिति में नहीं है कि मैं अपने आप को देख सकें अपने आसपास को देख सकते हैं लेकिन अपनी आंखों की पुतली के अंदर की तरफ माता-पिता की छानबीन नहीं कर सकते हाथ पर कोई चीज भी चले तो आपको उसका एहसास हो जाता है शरीर का खून दौड़ रहा है महसूस नहीं कर सकते क्योंकि आपकी ज्ञानेंद्रिय करो बाहर की ओर जीवन गुजारने की क्षमता को धरती रुप से आती है लेकिन कुछ जानना चाहे तो उसके लिए कोशिश करनी होगी जिससे पता नहीं का एक तरीका है जिससे बोलचाल की भाषा में विज्ञान कहते हैं विज्ञान का अर्थ है विशेष ज्ञान पांच ज्ञानेंद्रियों से हम लोग समझते हैं उसे ज्ञान कहते हैं जो समझ नहीं पाते फिर भी उसका बोल किया जा सकता है उसे विज्ञान कहते हैं


बच्चे के साथ पोस्ट करें फ़ोटो वीडियो, बनिए सुपर डैड  
18 जून तक सोशल मीडिया पर करें पोस्ट, सचिन तेंदुलकर के शाइन वाला मिलेगा बैट 
एक बच्चे के लिए जितना मां का दुलार जरूरी है उतना ही पिता का दुलार भी चाहिए। मां ममता की छांव है तो पिता  वट वृक्ष। हर विपरीत परिस्थितियों में बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़े रहने वाले पिता की अहमियत को दर्शाने के लिए यूनिसेफ ने 'बाप वाली बात' और 'अर्ली मोमेंट्स मैटर' नाम से मुहिम शुरू की है। इसमें सभी पिताओं को बच्चों के साथ प्यार भरे पलों की तस्वीरें और 10 सेकंड से 2:30 मिनट तक की वीडियो को सोशल मीडिया पर सुपरडैड के नाम से 18 जून तक साथ पोस्ट करना होगा। यह जानकारी बृहस्पतिवार को यूनिसेफ की जनसंपर्क विशेषज्ञ गीताली द्विवेदी ने दी। 
गीताली द्विवेदी ने बताया कि समाज के कुछ हिस्सों में पिता की सख्त छवि वाला समझा जाता है। बच्चे की लालन-पालन को घर की औरतों के जिम्मे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में बच्चे इस स्नेह से दूर रह सकते हैं इसे तोड़ने के लिए इस वर्ष यूनिसेफ ने यह अभियान शुरू किया है। इसमें चुने गए पिताओं को यूनिसेफ के ब्रांड एम्बेस्डर सचिन तेंदुलकर द्वारा साइन किया क्रिकेट बैट दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष फादर्स-डे पर पिताओं को बच्चों के लालन पालन में भूमिका को हाई लाइट किया जाएगा। जन्म के शुरुआती 3 वर्ष में शिशु के दिमाग का विकास 80% हो चुका होता है। ऐसे में बच्चे की दिमाग को वीडियो में भागीदारी के लिए प्रेरित करना स्वास्थ्य दिमागी विकास को सुनिश्चित करता है। 
सुपर डे इसीलिए जरूरी 
यूनिसेफ की अर्ली चाइल्डहुड डेवेलोपेन्ट चीफ डा. पिया ब्रिटो ने अपने संदेश में कहा कि बच्चे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके जरिए बच्चों को अपनी सबसे अच्छा बचपन दिया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के अनुसार, बच्चे को सबसे पहले 1000 दिन में प्रेम और दिमागी स्टिमुलेशन उसके संपूर्ण जीवन पर डालने वाले प्रभाव पैदा करते हैं। उसे सुरक्षा का एहसास मिलता है, जो मनोवैज्ञानिक रूप से मदद करता है। यह जीवन भर के लिए बच्चों के व्यवहार, उसके आत्मविश्वास, और आत्मसम्मान पर असर डालती है। 

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