असंभव कुछ भी नहीं
खेलने कूदने की नन्ही उम्र में पैर का काम न करना, किसी को भी निराश कर सकता है। मगर विल्मा ने कभी हार नहीं मानी।
हौंसले बुलंद हो, तो शारीरिक अक्षमता सफलता में बाधा नहीं बन सकती। कुछ ऐसी ही कहानी है विल्मा रूडाल्फ की।
23 जून 1940 को अमेरिका के टेनेसी प्रांत में जन्मी विल्मा अमेरिकन ट्रैक और फील्ड स्प्रिंटर थीं। उन्हें शोहरत यूं ही नहीं मिली, इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके पिता एक कुली थे। ढाई साल की आयु में उन्हें पोलियो हो गया, जिससे वह दिव्यांग हो गई। डॉक्टर भी ये मान चुके थे कि अब विल्मा नहीं चल सकेंगी।
विल्मा की माँ बहुत भी बहुत ही सकारात्मक सोच वाली महिला थी। वह विल्मा को कहा करती थीं की दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है और मनुष्य अपनी इच्छा शक्ति के डैम पर नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है। इसके बाद से ही विल्मा ने धावक बनने का फैसला ले लिया। नौ वर्ष की आयु में विल्मा ने जिद करके अपने ब्रेस निकलवा दिए। केलिपर्स निकलने के बाद विल्मा ने चलने का प्रयत्न किया, जिसमे उनको असहनीय दर्द और चोट का सामना करना पड़ा था। इतने दर्द के बाद भी उन्होंने चलने का प्रयत्न करना नहीं छोड़ा और वह एक - दो वर्ष में बिना किसी सहारे के चलने में कामयाब हो गई। 13 वर्ष की आयु में विल्मा ने दौड़ प्रतियोगिताओ में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। अपनी पहली दौड़ में विल्मा अंतिम पायदान पर रहीं, लेकिन आठ असफलताओं के बावजूद भी वह लगातार दौड़ प्रतियोगिताओ में भाग लेती रही। एक दिन ऐसा आया कि दौड़ प्रतियोगिता में विल्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी उम्र बढ़ती रही और सपने जवान। जब विल्मा ने टेनेसी राज्य विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, तो वहां उनकी मुलाकात कोच एड टेम्पल से हुई। टेम्पल ने उनके धावक बनने में काफी मदद की। विल्मा ने अपने अथक परिश्रम और ढृढ़ संकल्प के दम पर ओलम्पिक में हिस्सा लिया। उन्होंने 1960 में रोम ओलम्पिक में 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर रिले दौड़ में गोल्ड मेडल जीते। इस तरह वह अमेरिका की प्रथम अश्वेत महिला खिलाडी बनीं, जो बाद में धुरंधर अश्वेत खिलाड़ियों की प्रेरणा बनीं।
विल्मा रुडॉल्फ
जन्म : 23 जून 1940
मृत्यु : 12 नवम्बर 1994
खेलने कूदने की नन्ही उम्र में पैर का काम न करना, किसी को भी निराश कर सकता है। मगर विल्मा ने कभी हार नहीं मानी।
हौंसले बुलंद हो, तो शारीरिक अक्षमता सफलता में बाधा नहीं बन सकती। कुछ ऐसी ही कहानी है विल्मा रूडाल्फ की।
23 जून 1940 को अमेरिका के टेनेसी प्रांत में जन्मी विल्मा अमेरिकन ट्रैक और फील्ड स्प्रिंटर थीं। उन्हें शोहरत यूं ही नहीं मिली, इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके पिता एक कुली थे। ढाई साल की आयु में उन्हें पोलियो हो गया, जिससे वह दिव्यांग हो गई। डॉक्टर भी ये मान चुके थे कि अब विल्मा नहीं चल सकेंगी।
विल्मा की माँ बहुत भी बहुत ही सकारात्मक सोच वाली महिला थी। वह विल्मा को कहा करती थीं की दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है और मनुष्य अपनी इच्छा शक्ति के डैम पर नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है। इसके बाद से ही विल्मा ने धावक बनने का फैसला ले लिया। नौ वर्ष की आयु में विल्मा ने जिद करके अपने ब्रेस निकलवा दिए। केलिपर्स निकलने के बाद विल्मा ने चलने का प्रयत्न किया, जिसमे उनको असहनीय दर्द और चोट का सामना करना पड़ा था। इतने दर्द के बाद भी उन्होंने चलने का प्रयत्न करना नहीं छोड़ा और वह एक - दो वर्ष में बिना किसी सहारे के चलने में कामयाब हो गई। 13 वर्ष की आयु में विल्मा ने दौड़ प्रतियोगिताओ में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। अपनी पहली दौड़ में विल्मा अंतिम पायदान पर रहीं, लेकिन आठ असफलताओं के बावजूद भी वह लगातार दौड़ प्रतियोगिताओ में भाग लेती रही। एक दिन ऐसा आया कि दौड़ प्रतियोगिता में विल्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी उम्र बढ़ती रही और सपने जवान। जब विल्मा ने टेनेसी राज्य विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, तो वहां उनकी मुलाकात कोच एड टेम्पल से हुई। टेम्पल ने उनके धावक बनने में काफी मदद की। विल्मा ने अपने अथक परिश्रम और ढृढ़ संकल्प के दम पर ओलम्पिक में हिस्सा लिया। उन्होंने 1960 में रोम ओलम्पिक में 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर रिले दौड़ में गोल्ड मेडल जीते। इस तरह वह अमेरिका की प्रथम अश्वेत महिला खिलाडी बनीं, जो बाद में धुरंधर अश्वेत खिलाड़ियों की प्रेरणा बनीं।
विल्मा रुडॉल्फ
जन्म : 23 जून 1940
मृत्यु : 12 नवम्बर 1994
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