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Tuesday, 5 June 2018

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष 
जिंदगी के लिए पांच तत्व है, जल, हवा, आसमान, आग और मिट्टी। यहीं से हमें चेतना मिलती है। लेकिन नई सभ्यता के इस दौर में चेतना के यह स्रोत दूषित हो रहे हैं। प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह प्लास्टिक है। इस बार के विश्व पर्यावरण दिवस पर हमने प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति की राह चाह चाह रखी है। 
प्लास्टिक है खतरनाक, रहिए सावधान 
प्लास्टिक आज न केवल हर जगह हैं बल्कि लगभग हमेशा के लिए भी है। इससे बने बर्तनों में हम खाते पीते हैं, उसकी कुर्सी पर बैठते हैं, प्लास्टिक से बनी कारों में सफर कर रहे हैं। यह चीजें लंबे समय तक चले इसके लिए इन्हें डूएरबल बनाया जा रहा है। उपयोग बढ़े, इसके लिए कई रूपों में बनाया जा रहा है। इसमें सीलन नहीं आती और तरल वस्तुएं लीक नहीं होती। यह लचीला है, हल्का भी है यह हीरे की तरह महंगा नहीं है, लेकिन उसी की तरह सदा के लिए बनाया जा रहा है। इसका यही गुण हमारे और हमारी धरती व पर्यावरण के लिए खतरा बन चुका है। इस पर्यावरण दिवस पर इसे खत्म करने का दायित्व दिया गया है। जो हम सभी का है। 
निश्चित रूप से प्लास्टिक हमारे लिए उपयोगी तत्व है, यही वजह है कि आज जीवन के लगभग हर क्षेत्र में हम इसे मौजूद पाते हैं। लेकिन क्या कभी यह सोचते हैं कि जिस तरह लकड़ी, लोहे अथवा कागज की वस्तु के अन्य उपयोगी होने पर हम उन्हें फेंक देते हैं, क्या प्लास्टिक की वस्तुओं को भी फेंकना सही है? क्या होता है, जब हम इसे मिट्टी या पानी में फेंकते हैं? क्या होता है, जब हम इसे जलाते हैं? यह किसी अन्य तत्व याद जैविक चीजों की तरह पर्यावरण में घुलता नहीं बल्कि सैकड़ों साल तक वहां वैसे ही बना रहता है जहां इसे फेंका गया था। साथ उस जगह को अपने केमिकल से जहरीला भी बनाता जाता है, जिस मिट्टी में यह प्लास्टिक जाता है, उसे बंजर बना देता है। पानी में जाता है, तो पानी को ना केवल जहरीला बनाता है, बल्कि जलीय जीवो के लिए मौत का कारण बन जाता है। 
प्लास्टिक टीम, भारत मेजबान 
बीते 50 वर्ष में हमने जितना उपयोग प्लास्टिक का बढ़ाया है किसी अन्य चीज का इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया। 1960 में दुनिया में 50 लाख टन प्लास्टिक बनाया जा रहा था। आज यह बढ़कर 300 करोड़ टन के पार हो चुका है। यानी हर व्यक्ति के लिए करीब आधा किलो प्लास्टिक हर वर्ष बन रहा है। पर्यावरण से लेकर हमारे जीवन तक पर इसका बुरा असर सामने आ रहा है, फिर भी प्लास्टिक का उत्पादन बढ़ता ही जा रहा है। इस वर्ष इन्हीं वजहों से विश्व पर्यावरण दिवस 2018 की थीम प्लास्टिक प्रदूषण को मात देने पर आधारित की गई है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमें इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व पर्यावरण दिवस का मेजबान राष्ट्र बनाया है। 
प्लास्टिक से होने वाले नुकसान 
माइक्रो प्लास्टिक :- कॉस्मेटिक में उपयोग हो रहा माइक्रो प्लास्टिक या प्लास्टिक वर्ड्स पानी में घुलकर प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। इसकी मौजूदगी जलीय जीव में भी मिली है। माइक्रो प्लास्टिक मछलियों के साथ साथ भोजन श्रृंखला के जरिए पक्षियों और पशुओं में भी मिलने की पुष्टि हुई है। यही वजह है, कि भारत सहित कई देशों ने जुलाई 2017 में इस पर बैन लगाया लेकिन अब तक हमारे वातावरण को हुए नुकसान की भरपाई में कितना समय लगेगा, कहना मुश्किल है। 
समुंद्र में प्लास्टिक :- रिसाइक्लिंग से बचे और बेकार हो चुके प्लास्टिक का बड़ा हिस्सा हमारे समुद्रों में डंप हो रहा है।  वैज्ञानिक अध्ययनों का अनुमान है कि 2016 में समुंद्र में 70 खरब प्लास्टिक के टुकड़े मौजूद थे। जिसका वजन 3 लाख टन से अधिक है। 
जलीय जीवो में पहुंचा :- वैज्ञानिक अब तक 250 जीवों के पेट में खाना समझकर या अनजाने में प्लास्टिक खाने की पुष्टि कर चुके हैं। इनमें प्लास्टिक के टुकड़े बोतलों के ढक्कन, खिलौने, सिगरेट, लाइटर शामिल है। समुद्र में ज्वैलर्स समझकर प्लास्टिक बैग खाने वाले जीव हैं, तो हमारे देश में सड़कों पर आवारा छोड़ दे गई गाय इन प्लास्टिक के बैग पर छोड़े गए खाद्य पदार्थों के साथ बैग दिखा जाती हैं। साथ ही 693 प्रजातियों के लिए अच्छी और वन्यजीव अब तक प्लास्टिक के जाल, रस्सियों और अन्य वस्तुओं में उलझे मिले हैं। जो अक्सर उनकी मौत की वजह बनते हैं। 
बचाव में आर्थिक नुकसान :- संयुक्त राष्ट्र संघ पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक से बचाव में हो रहा निवेश विभिन्न देशों को आर्थिक रुप से भी नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिका अकेले 1300 करोड़ डॉलर अपने समुद्र तटों से प्लास्टिक साफ करने में खर्च कर रहा है। भारत जैसे देश के लिए भी यह बड़ा भार है। 
सी फूड से हमारे खाने में :- जो जलीय जीव प्लास्टिक खा रहे हैं, उनमें से कई मनुष्य की भोजन श्रृंखला का हिस्सा भी है।  जब यह जो प्लास्टिक हजम करने लगते हैं, तो ना केवल जीवों की जान के लिए खतरा बनते हैं, बल्कि उनका प्लास्टिक मनुष्य के भोजन की थाली में पहुंच रहा है। जिनके लिए सी फूड ही मुख्य भोजन है। 

प्लास्टिक को कहिए ना 
इस तरह किए जा रहे खत्म करने के उपाय 
सड़क निर्माण :- दुनिया के कई हिस्सों में अनुपयोगी प्लास्टिक कचरे से सड़कें बनाई जा रही हैं। 
रीसाइकिल :- इस समय दुनिया का एक तिहाई प्लास्टिक ही रीसाइकिल हो पा रहा है। वैज्ञानिको के अनुसार, प्लास्टिक को अधिक से अधिक मात्रा में रीसाइकिल करने की जरूरत है। 
अभियान :- मुंबई का वरसोवा तट, लोगों द्वारा प्लास्टिक से मुक्त करने के अभियान का एक अनूठा उदाहरण बना है। ऐसे ही अभियान देश के विभिन्न हिस्सों में चलाए जा रहे हैं। 
कंक्रीट :- ईरान सहित कई देश प्लास्टिक को छोटे टुकड़ों में तोड़ कर कई कंक्रीट के रूप में पत्थरों की कमी दूर करने के लिए उपयोग कर रहे हैं। 
पायरोलिसिस :- एक तकनीक है जिसके जरिए प्लास्टिक को ईंधन के रूप में बदला जाता है। 
खुद कर सकते हैं : थैला लेकर बाजार जाए। प्लास्टिक कचरे को कूड़ा संग्रह कर रहे एजेंसी के सफाई कर्मी को दें, ताकि उसका रीसाइकिल किया जा सके। 

903 करोड़ प्लास्टिक मौजूद है पृथ्वी पर 
6 करोड़ जंबो जेट के बराबर 
110 करोड़ हाथियों के बराबर एक हाथी करीब 7. 5 हज़ार किलो 
9 करोड़ ब्लू व्हेल के बराबर एक ब्लू व्हेल 1 लाख किलो 
9 एफिल टावर खड़े किए जा सकते हैं। 
19 हज़ार बुर्ज खलीफा जैसे इमारतें बनाई जा सकती हैं। 
9% प्लास्टिक की रीसाइकिल होती है 
609 करोड़ प्लास्टिक कचरे के रूप में धरती पर फेंका गया। 
79 प्रतिशत कचरा जमीन में भरा गया। 
1.3 करोड़ प्लास्टिक कचरा हर साल सीधे समुद्रों में गिराया जा रहा है। 
1 लाख करोड़ प्लास्टिक बैग हर वर्ष उपयोग हो रहे हैं। 
150 प्लास्टिक बैग हर व्यक्ति पर। 
8% जीवाश्म ईंधन प्लास्टिक निर्माण में हो रहा है खर्च। 

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