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Sunday, 17 June 2018

Google को चुनौती देगा भारत का डिजिटल मैप 'नाविक'
हेलो दोस्तों में अंकित सोनी आपका hindinewsspro में आपका स्वागत करता हूँ। आज में आप लोगो को स्वदेशी मैप के बारे में बताऊंगा तो आप  लोग इस पोस्ट को अंत तक्क पढ़ते रहे.... 
भारत ने आपने एक स्वदेशी डिजिटल मैप लांच करने वाला है जिसके जरिये हम आसानी से कही भी सटीक नेविगेशन कर पाएंगे।   
जल्द ही आपको किसी भी स्थान को तलाशने के लिए Google मैप खोलने की जरूरत नहीं होगी बल्कि आप एक क्लिक पर देसी डिजिटल मैप 'नाविक' के जरिए अपनी मंजिल तय कर पाएंगे। इसरो और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय मिलकर भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम के अंतिम चरण पर काम कर रहे हैं। जिसे 'नाविक' नाम से पुकारा जाएगा। जिससे भारत ही नहीं बल्कि नेपाल, भूटान, पाक और श्रीलंका में भी रास्ते से जा सकेंगे। चीन ने Google को आंतरिक सुरक्षा के चलते प्रतिबंधित कर रखा है। माना जा रहा है कि भारत भी अपना डिजिटल मैप सुरक्षा संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार कर रहा है। इसरो के नाविक प्रोजेक्ट में आईटी मंत्रालय प्रौद्योगिकी से जुडी मदद दे रहा है। 
पूरी तरह होगा स्वदेशी 
नाविक देश का स्वदेशी तकनीकी से पहला डिजिटल नेविगेशन सिस्टम है। साल के अंत तक इसके परीक्षण पूरे होंगे और इसके बाद आम आदमी के लिए इसे उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसकी मदद से भारत बिना किसी विदेशी मदद के समंदर में भी सटीक नेविगेशन कर पाएगा। साथ ही सैन्य अभियानों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। 






उड़ान में कैसे मिलेगा वाईफाई घरेलू विमान सेवाओं को वाई फाई से लैस किया जाएगा लेकिन आपको पता है यह सुविधा कैसे काम करेगी दूरसंचार आयोग द्वारा भारतीय हवाई क्षेत्र में विमान पर इंटरनेट और मोबाइल की इन फ्लाइट कनेक्टिविटी की अनुमति देने के बाद अब दूरसंचार ऑपरेटर और एयरलाइंस कंपनियां मिलकर इन सेवाओं को प्रदान करेंगे जल्द ही भारतीय घरेलू उड़ानों में वाई-फाई सुविधा की शुरुआत होने वाली है विमान में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए दो प्रकार की तकनीकों का उपयोग किया जाता है एयरपोर्ट ग्राउंड सिस्टम जिस तरह जमीन पर मौजूद मोबाइल ब्रॉडबैंड टावर से मोबाइल तक सिग्नल पहुंचाता है ठीक उसी तरह मोबाइल ब्रॉडबैंड टावर सिग्नल आपके आने से जुड़ेगा यह एंटीना विमान के बारे निचले हिस्से पर लगा होगा जो विमान के टेकऑफ करते ही नजदीकी टावर से सिंगल ले लेगा ताकि इंटरनेट आसानी से मिल सके लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि समुद्र के ऊपर से गुजरने के दौरान सिग्नल बाधित हो सकता है सेटेलाइट इसका इसमें दो तरह के सैटेलाइट आधारित को और का बैंड का प्रयोग होता है सैटेलाइट रिसीवर ट्रांसमीटर के जरिए धरती से सिग्नल लेते और देते हैं विमान का संपर्क सेटेलाइट से होता है जो धरती के करीब 35000 किलोमीटर ऊपर मौजूद हैं सबसे नजदीकी सैटेलाइट सिग्नल स्मार्ट फोन के ऊपर लगे एंटीना के जरिए जुड़ा होता है wifi सिग्नल के जरिए विमान यात्रियों को इंटरनेट तक पहुंच पाती है

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